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अगर चाहत नहीं तो कुछ नहीं.... Poetry / Shayari

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  अगर चाहत नहीं तो कुछ नहीं.... Poetry / Shayari  अगर चाहत नहीं तो कुछ नहीं यार पास नहीं तो जीना भी क्या जीना यार पास नहीं तो जीना भी क्या जीना डूबा तेरे इश्क में क्या कहे  बस तेरा बनकर रहु और नाम तेरा ज़ुबा पर बना रहे ख़्वाब हो ये पूरा  ख़्वाब हो ये पूरा  अगर चाहत नहीं तो कुछ नहीं यार पास नहीं तो जीना भी क्या जीना नहीं कोई और भाता मुझे दूजा  नहीं कोई और भाता मुझे दूजा  ज़िंदगी के मेरे अरमान रंगीन है  तू नहीं तो बे रंग मेरा जीवन है  तुझ से जुड़ा रहे रिश्ता मेरा  अगर चाहत नहीं तो कुछ नहीं यार पास नहीं तो जीना भी क्या जीना बस तू नज़र आ जाती हो हर दिशा  चुपी रहती हो इन निगाहों में और चल दिया मै तेरी गली  तुझ से मिलने क्या करे  बार बार तेरा साथ अच्छा लगता है  सौ बार कहता हु तू मेरी सांस  साया भी रूह भी ज़िंदगी का हर पल भी अगर चाहत नहीं तो कुछ नहीं यार पास नहीं तो जीना भी क्या जीना अच्छा लगता तुझे देखकर  अच्छा लगता तुझे देखकर  हर लम्हा जब गुज़रता है तेरे एहसास में खुशी मिलती जब तू मुझे छूती है  दर्द का समा ...