Hindi poem, Hindi kavita,हिंदी कविता........आसमान सुना
आसमान सुना.... poetry.. kavita आसमान सुना.... poetry.. kavita आसमान मेरा सुना रह गया सितारे जाने कहा खो गए. अंबर में छा जाने का इरादा था मेरा पर आज मेरे पंखो को जकड़ दिया मेरे सपनो को मरोड़ दिया जाने किसके आंखों में हम चुभने लगे है मुझ को हर बार संघर्ष करना पड़ा बोहत नेक तमन्ना थी मेरी बस मेहनत से आगे बढ़ने की ख्वाइश थी मेरी. आसमान मेरा सुना रह गया सितारे जाने कहा खो गए. राहो में जाने कितने शूल बिछे थे फिर भी हम चल पड़े बिना डरे हम दरिया दिल थे हर किसी पर भरोसा करते थे क्या ये थी मेरी खता जो साथ छोड़ा मेरा बीच रहा पर अपनो ने और क्या वो हसीन रात आएगी ज़िंदगी क्या फीर से झिलमिलाएगी. आसमान मेरा सुना रह गया सितारे जाने कहा खो गए. और कितना दूर जाना है कहा तक मुझे चलना है भरोसे को भी तो लेकर उड़ना है बड़ा कठीन था ये सफर बहुत सी ऊलझने परेशानी पर सुकून के पल भी थे देखा मंज़िल को करीब आते आते ओर कुछ पलो में तूफान से घिर गया वो समा, फिर से राहे बदल गई और. आसमान मेरा सु...