Hindi poem, Hindi kavita,हिंदी कविता............तू है मन मैं


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तू है मन मैं 


मन के किसी कमरे मे आज भी तेरी यादे महकती है

 तू अब मेरी नाही तो क्या हुआ ,दिल मे तो हैं

 दिल के करीब उसे भूलना नामुमकिन होता है 

 रिश्ते हमारे बनने बिगड़ने लगे  

दूरियों  पनपने लगी

लगा था में हम साथ साथ चलेंगे

और इस सफर को पूरा करेंगे

साथ हमारा दुनिया को ना भाया

भूली हुई वो बाते  आज भी मेरे साथ तहलती

तेरे कदमो निशान न रहे  तो कोई बात नही 

जीस मोड से तू गुज़री  थी वो मोड़ तुझे पूछता है

तू जसे बिछड़ने का गम तो हे

                    तू आसपास हे ये सोचकर खुश हम है...
by Sanjay Teli



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