मैं और तुम .......Hindi poem,Hindi kavita,हिंदी कविता,Hindi kavitayen


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 मैं और तुम 


अभी शाम गुज़ाकर आया  हूँ  तेरे संग

फिर क्यू बाते होती रही देर रात तक  मोबाइल पर 

जब साथ तेरे होता हूँ मै और तुम का मसला नहीं 

तब एक होकर बाते करते है 

जब दर किनारा किया था  दुनिया ने  मुझे  

तूने जब से कहा  में और तुम  चलेंगे साथ साथ  ज़िंदगी के सफ़र में

 तब से जीने की नई उम्मीद जागी 

वक़्त  को भी  मोड़ दूँगा अगर

ऐसा पल आये  जो तेरा साथ छोड़ने को मजबूर  करे 

 सोच मेरी अब बस  तेरे तक है और  पानी की तरह  साफ़ है

होंगे   मेरे अच्छे करम जो नवाज़ा मुझे कायनात  ने  तुझे 

भीड़ में जब  चलता हूँ तब बस मै और तुम होने का एहसास  होता है

तू कर ले  मुझ पर भरोसा ये एक आशिक की  दरखास्त  है 

देखो   होगा तुझे यकीन हुये आज से हमेशा की लिये  

 "मैं और तुम"  नहीं नहीं "हम "

                                         by Sanjay T


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