Poetry in Hindi || Kavita in Hindi || shayari || ज़िंदगी भी बेवफा ..सनम भी संगदिल

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ज़िंदगी भी बेवफा
सनम भी संगदिल


ज़िंदगी भी बेवफा
सनम भी संगदिल 
ज़िंदगी भी बेवफा
सनम भी संगदिल 
क्या करे इश्क जो हुआ
और जिस के लिए किया
उसे भुला नहीं सकते
ज़िंदगी भी बेवफा
सनम भी संगदिल 
हमे पता है आसान नहीं 
इस राह पर चलना 
फिर भी कदम बढ़ रहे 
ज़िंदगी भी बेवफा
सनम भी संगदिल 
इस अगन में 
बार बार जलने को जी करता है 
पर पता नहीं था 
ये वफा बस मेरे तरफ से होगी
ज़िंदगी भी बेवफा
सनम भी संगदिल 
और ये पागल दिल 
बस प्यार करता गया
वक्त मेरा कभी ना बदला
जीना बस नाम का रह गया
ज़िंदगी भी बेवफा
सनम भी संगदिल 
राते ज़हरीली लगती है 
फिर भी उम्मीद सी है 
कोई तो बदलेगा
ज़िंदगी भी बेवफा
सनम भी संगदिल…

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