Poetry in Hindi || Kavita in Hindi || Shayari Hindiतुझ से मिलने की लगन लगी

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तुझ से मिलने की लगन लगी 




तुझ से मिलने की लगन लगी है 

जीने के लिए मोहब्बत ज़रूरी है 

तस्वीर से अब दिल भरता नहीं

और इंतज़ार भी होता नहीं

और इंतज़ार भी होता नहीं

तेरे दीदार के लिए तड़पता हे ये दिल मेरा

पुकार बार बार दे के भी सदा मेरी अधूरी

तू पास थी तब कितना सुकून था

अब तो बेचैनी हर पल रहती है 

अब तो बेचैनी हर पल रहती है 

तुझ से मिलने की लगन लगी है 

जीने के लिए मोहब्बत ज़रूरी है 

तुझ से दूर रहकर तन्हाई दसती है 

मेरे अरमान अब सिमटे से लगने लगे

तू जो मिला तो सारा जहां मेरा था

मेरे ख़्वाबो का सिलसिला थम सा गया था

मेरे ख़्वाबो का सिलसिला थम सा गया था

पर तुझ से बिछड़ने के बाद 

देखो कैसी बदली मेरी दुनिया

खोया खोया मेरा जहां रात तनहा गुज़रती हैं 

गम हर पल रहता है जब से तू साथ नही 

गम हर पल रहता है जब से तू साथ नही

तुझ से मिलने की लगन लगी है 

जीने के लिए मोहब्बत ज़रूरी है 

बस तुम से मिलना ही मेरी अब तमन्ना है

रह जाए ना अधूरी ये फिक्र सताती है 

पर है मुझे यकीन अपनी मोहब्बत पर 

होगी तू मेरी बाहों में एक दिन

होगी तू मेरी बाहों में एक दिन.

             Poem by Sanjay T 


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