poetry || Shayari ये इश्क है इश्क, ye ishk hai ishk
poetry || Shayari ये इश्क है इश्क, ye ishk hai ishk मुझे क्या हुआ है इसी बात की खबर नही है बस उन से मुलाकात के बाद जैसे दुनिया मेरी बदल गई ये इश्क है इश्क सोचा नही था इस कदर मेरा हाल होगा मुलाकात का सिलसिला तो हर रोज चल रहा है फिर भी उसे मिलने के बाद मन नहीं भरता इसे हम क्या कहे इश्क या दीवानापन ये इश्क है इश्क जब जब टकराती है तुझ से निगाहे तब तब मेरी रूह तेरे और खींची चली आती है ये इश्क है इश्क जाने कितने दिनों से भटक रहा था मन तलाश रहा था पल सुकून के यहा तेरी बाहों में जैसे जन्नत मिल गई ये इश्क है इश्क ठहर ने का मन नहीं करता इस प्यार के सफर में तू जो है साथ और किसी की भी उम्मीद नही है ये खूबसूरत नज़ारे ऐसे ही बनाए रहे ये आशिक दीवाना बस ये ही चाहता है ये इश्क है इश्क. Poem by Sanjay T ****************************