Poetry || Shayari और एक बेवफा का नाम aur ek bewafa ka naam
Poetry || Shayari और एक बेवफा का नाम aur ek bewafa ka naam वो दर्द भरे पल बस बेवफा सा मंज़र वो दर्द भरे पल बस बेवफा सा मंज़र तू कहती थी मेरे साथ हर पल रहेगी पर तू तो कही नज़र नही आ रही है इंतज़ार की बात नही पर जरा लम्बा लगता है अभी हम थक चुके तेरी राह देखते देखते जब से तुमने वादा किया तब से हम तुमें रोज़ मिलने आते है और में कैसे भूलता मेरे प्यार को जिसने मुझे इश्क से रूबरू करवाया पर क्या कहू तू तो नही मिला तेरी बस यादों का कारवा ज़रूर चला वो दर्द भरे पल बस बेवफा सा मंज़र वो दर्द भरे पल बस बेवफा सा मंज़र वक्त बीत गया मौसम कितने बदल गए फिर भी देखी मैने तेरी राह था मुझे यकिन तु नही आनेवाली तुझे याद भी होगा कोई था तेरा चाहनेवाला इस जहा में उसकि गली की राहो से कितनी बार गुज़रा हू कही मिल जाती तेरी खबर पर वो बंद दरवाज़ा कभी नही खुला हर बार तमन्ना मेरी अधूरी अधुरी वो दर्द भरे पल बस बेवफा सा मंज़र वो दर्द भरे पल बस बेवफा सा मंज़र और एक आशिक दीवाना बना इस दुनिया में और एक बेवफा का नाम दर्ज हुआ हमेशा के लिए वो दर्द भरे ...