poetry || Shayari साथ छूटा तब से saath chhoota tab se
poetry || Shayari साथ छूटा तब से saath chhoota tab se ये मोहब्बत की कैसी कहानी है कोई दर्द सह रहा है तो कोई बेफिक्र की ज़िंदगी जी रहा है जाने कैसे ये दिन है इश्क का ये रूप बड़ा नाजायज है. कोई और बात नहीं है बस तेरी याद से बेहाल है मेरा दिल साथ छूटा तब से बस बेमतलब सा लगता है जीवन और क्या करू उसकी नाराज़गी जाने किस बात से बड़ी है उसका दीदार नहीं हुआ तब से बस दर्द का कारवा है इस हमसफर का हर दिल का बस यही सपना मिले दिल बर जो हो वफादार नहीं तो इश्क करने की वजह क्या जो दर्द का साथी बने. इस लिए ये दीवाना छोड़ चला इश्क की गली बस एक बार आखरी मौका मिल जाता तो तुझे आंखों में समा लेता उम्र भर के लिए नाराज़ दिल की कहानी यही है उसका साथ छोड़ना. Poem by Sanjay T ************************** ye mohabbat kee kaisee kahaanee hai koee dard sah raha hai to koee bephikr kee zindagee jee raha hai jaane kaise ye din hai ishk ka ye roop bada naajaayaj hai. koee aur baat nahin hai...