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poetry || Shayari मेरे हिस्से तेरा रूखापन ही सही mere hisse tera rookhaapan hee sahee

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 poetry || Shayari मेरे हिस्से तेरा रूखापन ही सही mere hisse tera rookhaapan hee sahee **************************** मेरे साथ चलोगे तो ज़माना लाख सवाल पूछेगा इसे तुम इश्क समझो या चाहत का आगाज़. **************************** मौत कि खूबसूरती बड़ी अजीब सी है  तन तेरा नग्न अग्नि की ज्वाला  राख का भस्म और मिट्टी में अंत. **************************** चांद से क्या उलझना  उसकी कितनी भी तारीफ कीजिए वो मेरे यार के आगे कुछ भी नहीं ऐसा खूबसूरत है वो जैसे पिघलता सोना. **************************** मेरे हिस्से तेरा रूखापन ही सही इसी बात से खुश है  अभी भी हम आपके खयालो में रहते है. **************************** चाहत कहा चुपी रहती है  बस नज़रों का मिलना ही बाकी था अब जो हो गया उसे ही तो इश्क कहते हे जिसे उम्र भर सीने से लगाए रखना है. Poem by Sanjay T  **************************** poetry || shayari mere hisse tera rookhaapan hee sahee mairai hissai tair rookhaapan haiai sahaiai mere saath chaloge to  zamaana laakh savaal poochhega ise tum ishk samajho ya chaahat ka aa...