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उन की नज़रों में क्या था un kee nazaron mein kya tha

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 poetry || Shayari उन की नज़रों में क्या था  un kee nazaron mein kya tha भीगी शाम रिमझिम बरसात में पर ये अचानक क्यू मौसम बदल गया. ***** कुछ बात है पर बयान करने में डर लगता है  जज़्बात ये नए नए है  और दिल की धड़कन भी तेज़ हो रही है मुझे प्यार की राह नज़र आ रही है. ***** उन की नज़रों में क्या था  क्या पता बस बार बार उन से  मिलने को जी करता है  इश्क का ये आगाज़ तो नहीं है. ***** मौसम का ये अंदाज भी अनोखा है  बारिश में दो दिल एक छाते में ज़रूर मिलते है . ***** मुस्कान  खिल जाती है  चाहे गम कितना भी हो मेरे दिल में ऐसा कमाल होता है उनके आने से. ****" bheegee shaam  rimajhim barasaat mein par ye achaanak  kyoo mausam badal gaya. ***** kuchh baat hai par bayaan karane mein dar lagata hai  jazbaat ye nae nae hai  aur dil kee dhadakan bhee tez ho rahee hai mujhe pyaar kee raah  nazar aa rahee hai. ***** un kee nazaron mein kya tha  kya pata bas baar baar un se  milane ko jee karata hai  ishk ka ye aagaaz to...