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poetry || Shayari फिर भी हिम्मत बरकरार रखी ye ishk hai ishk

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 poetry || Shayari फिर भी हिम्मत बरकरार रखी ye ishk hai ishk मुझे चिरागों से दोस्ती करने दो अंधेरा बड़े देर से सता रहा है कदम मेरे डगमगाते रहे  परेशानी साथ साथ चली  फिर भी हिम्मत बरकरार रखी और कामीयाबी मुझे मिल गई Poem by Sanjay T  ****************************