Poetry || Shayari उन निगाहों में एक जादू सा था un nigahon mein ek jadu sa tha
Poetry || Shayari उन निगाहों में एक जादू सा था un nigahon mein ek jadu sa tha खामियां तूने बड़ी देर से निकाली लगता है तेरी नज़र धोखा खा गयी हम तो पहले से ही बुरे थे बस तुम से मुलाकात के बाद थोडे बदल गए थे बार बार मिलना फिर एक दूसरे के बातो में वक्त को खो देना इन से मैं दिल से जुड़ चुका था उन निगाहों में एक जादू सा था जो तेरे पास हरपल जुड़ा रखता था मुस्कान मेरे चेहरे पर जैसे सजी रहती थी ज़िंदगी मेरी खुश मिजाज़ सी बन गयी थी वो पल भुलाये नही जाते तुझे याद किए बिना जिया नही जाता क्या करे प्यार का ये असर बड़ा गहरा था पर कहा सोचा था अंजामे इश्क इतना दर्द भरा होगा की तूम से मिलकर और मुझ से बिछड़ कर ही तुमे सुकून मिलेगा. Poem by Sanjay T ********************************