Poetry || Shayari उन निगाहों में एक जादू सा था un nigahon mein ek jadu sa tha

 Poetry || Shayari 

उन निगाहों में एक जादू सा था 

un nigahon mein ek jadu sa tha




खामियां तूने बड़ी देर से निकाली 

लगता है तेरी नज़र धोखा खा गयी 

हम तो पहले से ही बुरे थे

बस तुम से मुलाकात के बाद थोडे बदल गए थे

बार बार मिलना फिर एक दूसरे के बातो में

वक्त को खो देना इन से मैं दिल से जुड़ चुका था

उन निगाहों में एक जादू सा था 

जो तेरे पास हरपल जुड़ा रखता था

मुस्कान मेरे चेहरे पर जैसे सजी रहती थी

ज़िंदगी मेरी खुश मिजाज़ सी बन गयी थी

वो पल भुलाये नही जाते

तुझे याद किए बिना जिया नही जाता 

क्या करे प्यार का ये असर बड़ा गहरा था

पर कहा सोचा था अंजामे इश्क

इतना दर्द भरा होगा 

की तूम से मिलकर और 

मुझ से बिछड़ कर ही तुमे सुकून मिलेगा.


Poem by Sanjay T 

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