Poetry || Shayari देखे राह ये दीवानी हर पल dekhe raah yeh diwani har pal
Poetry || Shayari देखे राह ये दीवानी हर पल dekhe raah yeh diwani har pal पिया मोरे गए परदेश देखे राह ये दीवानी हर पल पिया मोरे गए परदेश पिया मोरे गए परदेश देखे राह ये दीवानी हर पल देखे राह ये दीवानी हर पल देखो मेरी मजबूरी तुझ से सहना सकू दूरी दिल मेरा नादान बार बार पुकारे बस तेरा नाम पिया मोरे गए परदेश पिया मोरे गए परदेश दीवानी समझती ये दुनिया मुझे बस तेरी ही बाते करती हु पिया मोरे गए परदेश तस्वीर तो बना ली पर रंग कैसे भरू, कुछ ना सुझे खोयी रहती हु पास नही मेरे सजन पिया मोरे गए परदेश देखे राह ये दीवानी हर पल देखे राह ये दीवानी हर पल वो नदी का किनारा सुखा सा लगे वो झूले भी खुश नहीं मेरा मन भी उदास है शाम भी गुमसुम तेरी मजबूरी अब मेरे तक आ गई है ज़िंदगी तेरे बिन नाम की रह गयी पिया मोरे गए परदेश पिया मोरे गए परदेश पुकारती रही में बड़े देर तक जवाब क्यू नहीं आया दर्द ही दर्द मिला पिया मोरे गए परदेश देखे राह ये दीवानी हर पल देखे राह ये दीवानी हर पल अब जीना जैसे काटो भरा पिया देखो तो बेरंग ये रात तेरे बगैर पिया...