Shayari || poetry वो मेरे दिल से जुड़ा था vo mere dil se juda tha
Shayari || poetry
वो मेरे दिल से जुड़ा था
vo mere dil se juda tha
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किसी की याद मुझे बोहत आ रही है
वो मेरे दिल से जुड़ा था
कही घंटे उसे बस निहार कर बाते होती थी
क्या कमला का वो पल था
उसका साथ सुकून भरा साथ था
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मेरे उदासी का कारण बस उस का
बिना बताए साथ छोड़ जाना है
हम नादान बस इसी उम्मीद में थे
आज नहीं तो कल इश्क हमारा परवान चढ़े
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ज़िंदगी से बड़ी जंग हो रही है
खुशी कर्ज से और गम सूत समीत मिल रहे है
दर्द का मेला तो हर रोज़ लगता है
फिर भी मुस्कान चेहरे पर
निरागस हो के खिलती है
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Poem by Sanjay T

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