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Hello dosto I have brought some Hindi shayari that you you surely like please read and comment on shayari
अब आसु ही साथी है…. poetry अब आसु ही साथी है अब ये ही मुकद्दर है अब आसु ही साथी है अब ये ही मुकद्दर है दूर जाना चाहता हु रूठकर नहीं तुझे खुश देखना चाहता हु पता है मुझे दर्द होगा तेरी याद ज़रूर सताएगी फिर भी तुझे भूलना चाहता हु पता है तुझ से अब मिलन होगा नहीं फिर भी कोई गम नहीं कभी कभी फैसले जो हम ना चाहे वो भी लेना ज़रूरी होता है अब आसु ही साथी है अब ये ही मुकद्दर है कोई बात नहीं आज तेरा हाथ मेरे हाथों से छूट रहा है देखो कैसी मजबूरी है पर तेरी ख्वाइश जो पूरी हो रही है अब आसु ही साथी है अब ये ही मुकद्दर है जब हम मिलते थे तब बहारे सजी रहती थी तेरी बाहों मे मेरी जैसी दुनिया बसती थी कितना खुश था मैं बस तेरा था तू भी तो वफा से भरी बाते किया करती थी अब आसु ही साथी है अब ये ही मुकद्दर है ज़िंदगी को तू बस इश्क से सजाती थी जाने क्या हुआ तू क्यू बदल गयी अब आसु ही साथी है अब ये ही मुकद्दर है दूरी ये दूरी बोहत बढ़ गयी मेरे वफा पर आच आ गयी अब हमारी भूली हुई कहानी बनकर रह गयी अब आसु ही साथी है अब ये ही मुकद्दर है. Poem by Sanjay T
Ye praarthana sun mere shiv shambhoo bhole baaba Har har Mahadev, Maha Shivaratri Bhajan/ Geet किसी के मन में बुरा खयाल ना आए नेक काम सब से होये ये प्रार्थना सुन मेरे शिव शंभू भोले बाबा ये प्रार्थना सुन मेरे शिव शंभू भोले बाबा भूत पिछाड़ किसी के पास ना आए भय हार ,जीत की चिंता ना सताए ये प्रार्थना सुन मेरे शिव शंभू भोले बाबा ये प्रार्थना सुन मेरे शिव शंभू भोले बाबा स्वस्थ सब का निरोगी रहे उलझन भरा जीवन सुलझ जाए ये प्रार्थना सुन मेरे शिव शंभू भोले बाबा ये प्रार्थना सुन मेरे शिव शंभू भोले बाबा Poem by Sanjay T
Hindi poem, Hindi kavita , हिंदी कविता काटे दोस्त कठिन है दूनिया कि राह पर चलना पथ पथ पर होगें घौर अंधेरा, हर पल होगा दौलत का बसेरा ,फिर भी मिलेगा तूमे आधा अधूरा! जीवन की खूबसूरत तसवीर आयेगी तूम को धूंघली नजर ये धोका है या हकिगत ,सोचते हि गूजर जायेगी ऊम्र सारी ठगी का यैसा जाल है ईसे बूधंने वाला है अपना प्यार किस पर तूम को है भरोसा ,सब पर छाया है माया का नशा कब तक ये काहानी चलेगी ,कभी तो होगी पूरी जूठे बादल एक दिन चले जायेगे प्यार की बरसात से डर जायेगे दोस्त कठिन है दूनिया की रह पर चलना यैसा लगता है , फिर क्यूँ ..... ? poembySanjayT ...
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