poetry || Shayari मंज़िल की तलाश में manzil kee talaash mein
poetry || Shayari
मंज़िल की तलाश में
manzil kee talaash mein
एक इंसान मंज़िल की तलाश में
भटकता रहता है
तो कोई बेईमान दूसरे का हिस्सा छीनकर
खुद पर इतराता है
पर तू मुश्किल दौर में भी डटा हुआ है
ये तेरा हौसला हर बुराई को तोड़ देगा
सोचा जो तूने वो तुझे ज़रूर मिलेगा
देख रहा हु मेहनत और चमकता हुआ
पसीना सब कुछ बयान कर रहा है
हा तूने सबक तो सिखा होगा
हर परेशानी में कुछ लोग साथ छोड़ देते है…
पर तू और निखर जाता है इसी मुसीबत से
तेरी हिम्मत जो बढ़ रही है
वो तेरे सबर का नतीजा हे
और तेरे जो ख्वाब है वो सवार रहे है
तू उदास ना हो अगर देर हो जाए
जो तूने सोचा वो ना मिले तो
कामियाबी का मिजाज़ जरा सा टेढ़ा होता है
अगर आसानी से मिल जाए
तो उसका मोल कम हो जाता है
तू बढ़ता जा आगे बढ़ उसी हिम्मत से
मंज़िल सज कर बैठी है
तेरी आने की खुशी में.
Poem by Sanjay T
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